आज का राशिफ़ल

हमारे संवाददाता



1. रमाकांत यादव (सागर यादव जख्मी)
सीनियर एडिटर मुंबई

2.अशोक कुमार शर्मा
एडिटर (उत्तराखंड)

3. वंदना शर्मा 
एडिटर ( उत्तर प्रदेश)

4. रवींद्र त्रिपाठी

ब्यूरो चीफ (फतेहपुर)

5. सुभाष शुक्ला
ब्यूरो चीफ (चित्रकूट)

6. संदीप शर्मा 
ब्यूरो चीप (लखीमपुर खीरी)

7.अश्वनी शर्मा 
सवांददाता (पानीपत)


8. आनंद कुमार 
सवांददाता (लखीमपुर खीरी)

9.दीपक कुमार
सवांददाता ( लखीमपुर  खीरी)

10. रोशन कुमार झा
सवांददाता ( पश्चिम बंगाल )


12. सुधांशू कुमार
सवांददाता

13. अतुल कुमार
सवांददाता

14. आर्टिस्ट बेताल 
सवांददाता

15. संजू शर्मा
(सवांददाता)

16. ओपी मेरोठा
(संवाददाता) राजस्थान

17.विनय शर्मा
(सवांददाता) लखीमपुरखीरी 
18. दीपक क्रांति

(एडिटर) झारखंड- बिहार

19. रूपक चौधरी


  • ब्यूरो चीफ (झारखंड- बिहार) 

टिप्पणी पोस्ट करें

1 टिप्पणियां

  1. असालामु अलीकुम्

    आज करीब गद्दी मुस्लिम समाज मे *युवाओं की आबादी करीब 40% से 50% है और कॉम का नोजवान अगर ठान ले तो समाज का रुख मोड़ सकता हैं ऐ मेरी गद्दी कॉम के नोजवानो पढ़ो क्योंकि तुम्हें इस जमाने मे अपना सर उठाकर चलना है* आज गद्दी मुस्लिम समाज बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है और पूरे समाज मै एक अजीब सी बेचैनी है l आप सही कुछ देर अपने दिमाख से सोच कर देखो हम कहा से कहा पहुँचते जा रहा है और जमाना आगे बढ़ रहा है और हम बात बात पर गोली चलाने और झगड़े करने मै मस्त है और हमारे चारों तरफ़ नापाक़ इरादों से बढ़ते हुए ज़ालिमों के हाथ हैं जो तूम्हे अपने चंगुल में जकड़ लेना चाहते हैं। जो तुम्हें नफ़रत की जंजीरों में कसकर बांध लेना चाहते हैं। जो तुम्हें निचोड़ कर फेंक देने का मंसूबा रखते है l
    गद्दी मुस्लिम समाज तालीम को लेकर इस हद तक़ पिछड़े हुए हो की हमारे समाज के करीब 60% लोग थाना मै एक सही लेटर और कचहरी में एफिडेविट नही लिख सकते और वाह जाते हुए भी डरते है।
    क्योंकि हमने अपने आप को इल्म की रौशनी से खुद को बहुत दूर कर लिया है। क्योंकि हमने अपने आका (स.अ.व.) के उस कौल को भुला दिया जिसमें उन्होंने कहा था की *इल्म हासिल करो माँ की गोद से लेकर कब्र तक़" आप (स.अ.व.) ने बार-बार इल्म की अहमियत को समझाया पर हमने उन समझाईशों और सीखों पर अमल करना छोड़ दिया*
    जिसका नतीजा ये हुआ की आज गद्दी मुस्लिम समाज इल्म से बहुत दूर हो गए। हमारे समाज ने भुला दिया है कुरआन की उस पहली आयत को जिसका *पहला लफ़्ज था की "पढ़ो"। तुमने कुरआन और अपने आक़ा की सारी नसीहतों का दरकिनार कर दिया* और आज नौबत ये हो गई है की जिस उम्मत के आख़री पैगंबर (स.अ.व) इल्म और तालीम को लेकर अपनी पूरी ज़िंदगी ज़ोर देते रहे और आज पुरी मुस्लिम कॉम और गद्दी समाज तालीम के मामले में पूरे हिंदुस्तान में सबसे ज़्यादा पिछड़ी हुई है
    हमारे गद्दी मुस्लिम समाज को पूरे भारत में खोजने और एक मंच पर लाने के लिये हमारे बुजुर्गो ने ना जाने कितनी महनत की और गद्दी समाज को एक जगहा और एक मंच दिया l
    गद्दी मुस्लिम नोजवानो के अंदर पुरी कुशलता भी है। और क़ाबिलियत भी अंदर कूट कूट कर भरी हुई है। जो काम एक पढ़ा लिखा इंजीनियर नहीं कर पाता वो मुस्लिम नोजवान जो 16-18 साल के लड़का है अपने बाएं हाथ से कर देता हैं हमारी गद्दी कॉम बिना डिग्रियों के एक बेहतर इंजीनियर हो, फैशन डिजाइनर हो, अग्रीकलचर, इंटीरियर डिजाइनर हो, बड़ी से बड़ी मशीनें तुम्हारे लिये खिलौना है, मुश्किल से मुश्किल काम तुम चुटकियों में निपटा लेते हो। सारी खूबियाँ हैं तुम्हारे अंदर, बस अगर इसमें आप की एडुकेशं डिग्री का तड़का लगा दिया जाए तो तुम यकीनन वो कर सकते हो जो दुनियाँ सोंच भी नहीं सकती। तुम मुकाम हासिल कर सकते हो जिसके तुम हक़दार हो तुम अपनी क्षमता को अगर सर्टिफाईड क्षमता में बदल लो तो जमाना आप के पीछे घूमते नज़रआएंगे

    आप यकीन जानों की अगर आप पढ़ लिख लोगे तो दुनियाँ के सामने आप अपना सर उपर उठाकर चलने का सलीका सीख लोगे फिर कोई तुम्हारी तरफ़ अपनी आंख उठाकर देखने कि ज़ुर्रत नहीं करेगा इंशाअल्लाह।

    *आज के दौर में गद्दी मुस्लिम समाज के सभी लोगों को मिलकर को एक लोंग प्लान बनाना होगा क्युकी हमारी हर समस्या का समाधान सिर्फ़ तालीम मे है और जिस दिन गद्दी मुस्लिम समाज के सभी लोगों ने इस को अपना लिया उस दिन आपकी तरक्क़ी के रास्ते खुलने लग जाएंगे* उस दिन कामयाबी, दौलत और शोहरत तुम्हारे पीछे-पीछे चलना शुरू कर देगी। अपना पहला मक़सद बनाओ की आप भूखे रह लोगे, नर्म बिस्तर की जगह फर्श पर सो लोगे मोटरसाइकिल की जगह कुछ दिन साईकिल चला कर गुजार लोगे पर अपनी बचो को तालीम के रास्ते पर जरूर लेजाओगे और किसी तरहा की रुकावट नहीं पैदा होने दोगे। क्योंकि तुम्हें सर उठाकर मीलों तक़ चलते चले जाना है।

    *हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नही*

    स्वीकार करने की हिम्मत
    और सुधार करने की नीयत हो तो इंसान बहुत कुछ सीख सकता है।हमको कितने लोग पहचानते है ?उसका महत्व नहीं है,*लेकिन क्यों पहचानते है..?इसका महत्व है. ............
    शुक्रिया

    मोहम्मद इलियास
    महासाचिव
    ऑल इंडिया गद्दी समाज दिल्ली प्रदेश इंडिया

    जवाब देंहटाएं