आज का राशिफ़ल

इंक़लाब नारीशक्ति मंच दैनिक चित्रकाव्य प्रतियोगिता - 9 में सम्मिलित कविताएँ


 1. 


लक्ष्मण जी हुए जब मूर्छित

राम जी भी हो गए चिंतित


पास में बैठी सब वानर सेना

प्रभु के लिए करती प्रार्थना


सुग्रीव भी खड़े ढाढस बंधा ने

खड़े राम जी के साथ दुख बांटने


खड़े हनुमंत शीश झुकाए

राम जी कब आदेश फरमाए


ऋषि-मुनियों ने दवा बताई

हनुमान ने संजीवनी है लाई


बूटी से लक्ष्मण के प्राण वापस आए

हनुमान जी की सब जयजयकार गाये



(स्वरचित- प्रिती धीरज जैन)


2. 


इस संसार ने भगवान को भी रूला दिया।

स्वपरीक्षा के लिए ऐसा चक्र भी चला दिया ।

हनुमत जाओ तुम संजीवनी खोज लाओ ।

इस काल के जाल से अनुज को बचाओ।


गोद में पड़े अनुज तुम भाई कुछ तो कहो ।

जवाब क्या दूँगा मैं सीता को क्या कहूँगा।

जिनकी सेवा के लिए छोड़ा तुमने सब कुछ ।

आज मेरा विलाप सुन मेरे भाई उठ जाओ तुम।


सीता साथ नहीं और तुम भी छोड़ चले ।

क्या जवाब दूँगा माताओं को क्या कहूँगा ।

वीरो तुम ही बताओ मैंने क्या पाप किया।

आज मेरा भाई क्यों इस शक्ति को सह रहा।


क्या करूँगा जीवन का मैं लक्ष्मण के बिन।

जिस लक्ष्मण के बिन न गुजरता  मेरा दिन।

आज रात कट नहीं रही काल डस रहा है।

सुख का सूर्य उदय क्यों नहीं हो रहा है।

- मीना जैन दुष्यंत


3. 


सिया हरण के युद्ध में 

श्री राम चले थे लंका, 

युद्ध बड़ा विराट था

बच गई सबकी डंका।


 इंद्रजीत ने जब लखन पर 

 शक्ति बाण चलाई, 

 सब वानर सेना ने मिलकर 

 खूब हाहाकार मचाई। 


 चिंतित हो उठे राम जी 

 उनको कैसे उठायें, 

 लखन दुलारे गोद मे सोएं 

 कैसे उनको बचाएं। 


 फिर विभीषण जी बोले 

 सुसैन बैद्य को बुलाये 

 वही बताएगें की कैसे, 

 हम लखन के प्राण बचाए। 


 बैध जी ने जड़ी बूटी की 

 रट देखो है लगाई, 

 हनुमत जी ने धौलागढ़ से 

 संग-संग संजीवनी लाएं। 


 बूटी की रस जैसे ही 

 मुख मे लक्ष्मण जी के डाले 

 लक्ष्मण जी भी खड़े हो गए 

 तीर धनुष को टाने, 

 

 देख नजारा राम जी 

 प्रसन्नता से हो गए वारे, 

 सेना मे लग गई देखो 

 खुशियों के नज़ारे। 


 - प्रियंका साव 

 पूर्व बर्द्धमान, पश्चिम बंगाल



4. 


**********************

लक्ष्मण मेघनाद संग युद्ध भए,

लक्ष्मण ने ललकारा मेघनाद को।

मेघनाद जब तीर चलायो,

शक्तिबाण लगे उर लक्ष्मण को।

अग्रज राम के नैना भरी आए,

नैना निरखे मूर्क्षित अनुज लक्ष्मण को।

 अग्रज राम के जिया घबराए,

 अतिशीघ्र वैध बुलाये सुषैण को।

 बैध सुषेण औषधि बतलाए,

दूत हनुमान चले संजीवनी वटी को।

 द्रोणागिरी पर्वत संजीवनी संग लाएं,

 जब नही ढूंढ पाए संजीवनी वटी को।

संकट से लक्ष्मण को हनुमान उबारे,

दूत हनुमान अतिप्रिय भये प्रभु राम को।

सारी वानर सेना के मन हर्षाए,

सुर ,नर, मुनिजन देख संकर सुवन को।

मन ही मन अंजनीसुत के गुण गाएं,

लीला अद्भुत देख पवनसुत की।

अग्रज राम के गोद मे लक्ष्मण मुस्काए,

जब आये होश सुमित्रानंदन को।

****************************

कवयित्री ;-शशिलता पाण्डेय

बलिया (उत्तर प्रदेश)


5. 


लंका की धरती में,

   रो-रो कलपे है राम।

बचालो लक्ष्मण भैया को

    वो मेरे प्रिय हनुमान।


कैसे मूँह दिखाऊँगा मैं,

    उर्मिला बहना को

कैसे वचन निभाऊँगा मैं

 जो दिया सुमित्रा मईया को

कैसे बचाऊँगा मैं

  लक्ष्मण भैया के प्राण


लक्ष्मण भैया के बिन,

   मैं कैसे जी पाऊँगा

बिन भुजाओं के मेरे

   मैं कैसे धनुष उठाऊँगा।

हे हनुमंत विनय तुमसे

   आज बचाले मेरी लाज


हनुमंत वीरा जाओ

   बुकी संजीवनी ले आओ

मुर्छित लक्ष्मण के देह को

   पुनः चेतना में लाओ

हे महावीर बजरंगी

   ढल न जाये रात।


- साक्षी साहू सुरभि महासमुंद छत्तीसगढ़


6.

चित्र चिंतन

जिंदगी में कुछ नहीं है तेरे बिना लक्ष्मण

तू ही साथी ,तू ही प्यारा, तु ही दुलारा।।

हर सुख दुख में तु ही सहारा 

 मैं अयोध्या कैसे जाऊँगा?

मैं अपने मुख कैसे दिखाऊंँगा

लौट के आजा मेरे भाई।।

तू मेरा साथी तू मेरा ही सहारा

तेरे बिना रो रहे हैं ,हम सब वानर भाई।।

तेरे बिना जीवन अधूरा है, तु ही भक्ति तू ही  शक्ति।।

पल पल मैं तड़प रहा हूंँ भक्त विभीषण कुछ तो बता?

प्रभु रघुराई, एक बात बताऊँ ,

संजीवनी बूटी ही है एक उपाय।।

इसी  बुटी से ही लक्ष्मण भाई का जीवन बच जाए।।

रामजी ने आज्ञा दी, हनुमत मेरे तुम प्यारे।।

तुम्ही हो संकट मोचन हनुमान, तुम ही हो हमारे वानरों के शान।।

जाओ प्यारे हनुमत, लक्ष्मण के जान बचाओ।।

राम जी की आज्ञा मानकर, चले पवनसुत हनुमान।

जय श्रीराम जय श्रीराम भक्त हनुमान

करें उड़ान, संजीवनी बूटी लाकर

लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले, भक्त हनुमान।।

जय श्रीराम जय श्रीराम, किए लोक का कल्याण।।

 -  सीमा साहू सुभाष नगर दुर्ग✍️


7.


 राम की सेना में 

    ,,,मचा हाहाकार,

 मेघनाथ ने शक्ति

 बाण चलाया

 लक्ष्मण मूर्छित हो गिरे धरती

     भ्राता राम विलाप करें

 बड़े बड़े योद्धा गण

     सुग्रीव हनुमान 

अंगद जामवंत

 किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े रहे

    समझ ना पाए 

कोई कुछ भी

 बहुत सोचा कोई युक्ति काम ना आए

 भ्राता शोक में डूबे राम

 विलाप कर रहे हैं 

 ह्रदय विहल 

 सुषेण वैद्य तभी पधारें

   वैद्य जी ने युक्ति बताई

 संजीवनी बूटी ले

हनुमान आए

  लक्ष्मण की जान बचाई।


- अंशु तिवारी पटना


8.


मेघनाथ ने ब्रह्म शक्ति के प्रयोग की ठानी,

रामसेना को रण में परास्त करने की मानी,

शक्ति बाण की ज्यों ही प्रत्यंचा खींच लाई ,

भीषण प्रहार तुरंत लक्ष्मण की छाती भेदत आई।


लक्ष्मण मूर्छित हुए, पड़े लंका की धरा पर,

देखे दशरथ नंदन, अनुज को ऐसी अवस्था पर,

व्याकुलता से हुए अति गंभीर-अधीर वनवासी,

जामवंत वानर सेना में दुख की ख़ामोशी पसराई।


हे अनुज आज भी, तुम अग्रज की आज्ञा मानो,

मूर्छा को त्यागो, उठो जागो नयनों के पट खोलो,

उर्मिला के समक्ष हम सब निरूत्तर हो जाएंगे ,

बिना तुम्हारे रघुकुल का वचन कैसे निभाऊँ भाई।


भक्त हनुमान शीघ्र ही सुसैण वैद्य को लाए,

वैद्य ने रातों-रात ही संजीवनी बूटी दवा बताई,

जाओ द्रोणागिरी शिखर ले आओ महावीरा,

व्याकुलता में स्वयं भक्त से विनय करत हैं रघुराई।


- रजनी शर्मा अध्यापिका दिल्ली।


9.


समर भूमि में मेघनाद ने,

लक्ष्मण को शक्ति लगायी।

फिर हुए मूर्छित लक्ष्मण तो,

चिंतित हुये  रघुरायी   ।

हे लक्ष्मण तुम कुछ तो बोलो,

उठ जाओ  मेरे भाई  ।

नहीं रह पाऊँगा  बिना तुम्हारे,

यह कैसी घड़ी आयी ।।

जब तक लक्ष्मण थे बेसुध,

सारे वानर भी थे चिंतित ।

राम तो स्वयं भगवन थे,

पर भाई वियोग में थे द्रवित ।

भक्त बिभीषन ने बतलाया,

अगर संजीवनी कोई ले आया  ।

बच सकते हैं प्राण अनुज के,

सुमेर पर्वत पर है यह छाया ।

राम ने दी आज्ञा हनुमत को,

जाओ वीर हनुमान।

लाकर संजीवनी बूटी को,

लक्ष्मण के बचा लो प्राण ।।

राम भक्त हनुमान तुरत ही,

जा पहुँचेसमेरु पर्वत पर ।

पता नहीं था कौन हैं बूटी ,

उखाड़  लाये वह पूरा पर्वत।

सुखेन  बैद्य ने लक्ष्मण के,

हाथों में  बूटी लगायी ।

लौटी चेतना भाई की ,

तो खुश हो गये रघुरायी ,महावीर हनुमान ने भक्ति पूर्ण निभायी,

कर उपकर राम पर तुमने ,

तुम तो हो मेरे भाई।।

         उमा शर्मा -उमंग

         झाँसी उ 0प्र0


10.


त्रेता युग लंका अधिकारी ।

हरण किया सीता दुख भारी ।।


हुआ अधिक परिणाम दुखारी ।

समर राम रावण में भारी।।


शक्ति लगी भए लखन बेहाला ।

आया कठिन सयय विकराला ।।


शांत हुआ कोलाहल भारी।

बैठी सेना प्रभुहिं निहारी ।।


सदा रहत जो प्रभु अभिरामा।

मलिन वदन चिंतित भगवाना ।।


काह करैं कस अनुज सम्हारैं।

शीश अंक धर राम विचारैं।।


पवन पुत्र गए तुरत अकाशा।

आने गरुण मिटा सब पाशा।।


उठे लखन तब मुर्छा त्यागी।

बोले राम प्रेम रस पागी।।


हनुमत कियो मोर कल्याणा।

कर उपाय राख्यो तव प्राणा।।


हृदय लगाए दोउ अनुरागा।

प्रभु असीष सबकर श्रम भागा।।


- वंदना तिवारी

लखनऊ,उत्तर प्रदेश


11.


बान लगयो जब लक्ष्मण को 

भ्राता राम आंसू बहाऐं।।

मूर्छित हुए भाई लक्ष्मण को 

गोद मे अपनी थे सुलाऐ।।


ऋषि, मुनि,तपस्वी देख मूर्छित लक्ष्मण

सोचे कैंसे लक्ष्मण के अब प्राण बचाऐं।।

तभी तपस्वियों ने कहा संजीवनी ही

महान औषधी शीर्घ हम कहां से लाऐं।।


सब देखें पवनपुत्र लला को हनुमानजी

समझ गये राम से आज्ञा पाऐ।।

राम ने बोला हे हनुमान शीर्घ ही आना

तुम्हरी राह हम नित निहारे।।



हनुमान जी गये गिरी पे देख संजीवनी मुस्काऐ

पर हनुमान न समझे कौन संजीवनी कौन पराऐ

उठा लाऐ पूरा गिरीवर लक्ष्मण को तुरंत उपटन

लगवा मूर्छित अवस्था भगवाऐ।।


जयजय कार करे हर कोई लक्ष्मण के

जब प्राण वापस आऐ।।

आज भी हनुमानजी राम लक्ष्मण सीता को

दिल मे बसा परम भक्त कहलाऐ।।


वीना आडवानी

नागपुर, महाराष्ट्र

************


12. 


चित्र के अनुसार रचना

 लक्ष्मण को लगा शक्तिबाण



राम लक्ष्मण का आपस में जो था प्यार।

भाई भाई में इसी प्रकार सभी करें संसार।


मेघनाथ ने मारा था लक्ष्मण को शक्ति बाण।

संकट में पड़ गए थे रामचंद्र जी के प्राण।


मैं क्या मुंह दिखाऊंगा उर्मिला व सुमित्रा मैया।

 मैंने तो पत्नी के कारण गवाया लक्ष्मण भैया।


दल में चारों तरफ मच गया फिर हाहाकार।

 सभी आपस में एक दूसरे को रहे निहार।


प्रभुजी करने लगे फिर  करुण क्रंदन।

 तुम ही कुछ उपाय करो मारुति नंदन।


 हनुमान जी लंका में अति शीघ्र ही किये प्रवेश।

 क्योंकि उनके लिए था यहां प्रभु का आदेश।


महावीर सुषेन वैद्य को लेकर के वह आए।

 उन्होंने प्राण बचाने के फिर उपाय थे बताएं।


 सुषेन वैद्य के अंदर थी राम के प्रति श्रद्धा भक्ति।

 जिससे वह लोगों के प्राण बचाने की रखते शक्ति।


 फिर हनुमान जी से संजीवनी बूटी  वह मंगवाए।

 पवन पुत्र बूटी लाने के लिए बड़े बैग से धाये।


 द्रोणागिरी पर्वत पर वह कुछ समझ ना पाए।

 कुछ समझा नहीं तो पर्वत ही उखाड़ कर लाए।


 संजीवनी पाकर के लक्ष्मण को होश आया

 उनके साथ साथ सारे दल में भी जोश आया।


 लक्ष्मण को लगा कि जैसे वह सो कर के जागे थे।

 क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम तो उनके आगे थे।


उन्हें तो कुछ आभास ही नहीं की क्या हुआ था।

तीर उनके लगी थी पर दर्द तो प्रभु को छुआ था।


ऐसे प्रभु भक्तों को गीता भी करती है नमन।

 सत सत वन्दन व कोटिशः करती अभिनन्दन।


- गीता पांडे उप प्रधानाचार्य करहिया बाजार रायबरेली उत्तर प्रदेश


13.


इंक़लाब नारी शक्ति मंच

चित्राधारित काव्य रचना प्रतियोगिता 


जग का पालनहार भी देखो

भातृ प्रेम में रोया है,

कोई कुछ उपचार करो

मेरा लक्ष्मण मूर्च्छित सोया है!


माता कैकेयी ने तो केवल

मुझको था वनवास दिया,

फिर क्यूँ मैंने सीता और 

लक्ष्मण को अपने साथ लिया!


सुकुमारी सीता का वन में 

रावण ने कर लिया हरण,

इंद्रजीत की शक्ति से अब

लक्ष्मण भी है निकट मरण!


लौट अयोध्या क्या मैं

घरवालों को मुँह दिखलाऊँगा,

मात सुमित्रा और उर्मिला 

से मैं क्या बतलाऊँगा!


सबके ह्रदय काँप रहे थे

देख प्रभु का ये क्रंदन,

भाई का सिर गोदी में रख

अश्रु बहाते रघुनन्दन!


हनुमान तब लंका जाकर

वैद्य सुषेण को ले आए,

बोले वैद्य बचेगें लक्ष्मण 

कर लो यदि ये एक उपाय!


हे हनुमान, सुमेरु पर्वत

पर तुमको जाना होगा,

कुछ घंटों के भीतर-भीतर 

संजीवनी लाना होगा!


हाथ जोड़ हनुमान प्रभु से 

लेते आज्ञा जाने की,

आज घड़ी है प्रभु की ख़ातिर 

अपना फ़र्ज़ निभाने की!


ढाँढस देते जामवन्त भी 

चिंता का प्रभु त्याग करें,

मूर्छा से जागेगें लक्ष्मण 

भक्तों पर विश्वास करें!


-स्वीटी सिंघल ‘सखी’

बैंगलोर 

स्वरचित मौलिक रचना


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