आज का राशिफ़ल

*फेमिनिज़्म के सही मायने*




अपनी गरिमा को और संवारकर स्वनिर्माण को प्रश्रय देना ही मेरे ख्याल से फेमिनिज़्म की एक पुख्ता पहचान होती है.

दरअसल फॅमिनिज़्म मतलब पुरुषों से अधिक सफल  होना या  उनको डोमिनेट करने के कारण खोजना नहीं बल्कि पुरुषों के बराबर का अधिकार पाने के लिए कर्म करना और पुरुषार्थ करना है। और उससे अधिक स्वयं को इस समाज में मजबूती से स्थापित करना ही फॅमिनिज़्म है। 
ही फॅमिनिज़्म है। 
स्त्री का स्वयं को समाज में स्थापित करना , अपने नैसर्गिक मानव अधिकारों के प्रति सचेत रहना और व्यक्तिगत अचीवमेंट प्राप्त करते रहना। सोच वा विचारों से भी ख़ुद को सिर्फ किसी समुदाय  विशेष  की  प्रतियोगिता से बाहर रखकर अपने आवश्यक मानव अधिकारों को पा लेना ही असली फॅमिनिज़्म है।

मैं ऐसा सोचती हूँ कि...  पुरुषों के साथ पूरे सम्मान और पुरुषार्थ के साथ बराबरी करना । सनद रहे पुरुषार्थ सिर्फ पुरुषों का गुण नहीं है। ये है असली फॅमिनिज़्म जहां कर्म के साथ अपने अधिकार पर दावा किया जाता है ...मतलब 
जीवन जीने की जो पद्धति और  वाली व्यवस्था है उसमें कर्मठता का भी स्थान होना चाहिए. स्त्री हो तो सिर्फ कोमलांगी और कमज़ोर सी बनकर या सभाओं में पुरुषों के खिलाफ भाषण देना स्त्रीत्व की निशानी नहीं 
बल्कि महिला होने का फायदा उठाकर विकाशशील होने का सिर्फ स्वांग करना हुआ. 
      फॅमिनिज़्म का मतलब पुरुषों की तरह जीवन जीने की स्वतंत्रता की माँग रखना भर नहीं बल्कि उनकी तरह पुरुषार्थ और स्वाभिमान को सर्वोपरि रखकर  धन अर्जन करना और जीविकोपार्जन करना भी भी आना चाहिए। 
नोट : मेरा ये आर्टिकल किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं वरन मेरे विचार भर हैँ. 

- *आराध्या अरु* 

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