आज का राशिफ़ल

अन्नू साह अनुपम की कविता - आखिरी -



आख़िरी" शब्द ले आता हैं रिश्तें को

समाप्ति के इतना करीब जहाँ से शुरुआत करना लगभग असंभव सा होता हैं...


कितना कठिन शब्द हैं न?

उसके लिए ...

जो तमान इच्छाओं के विरुद्ध जाकर किसी को ये शब्द लिख रहा हो 

और उसके लिए भी जिसे ये शब्द मिलने को हो...


आख़िरी" शब्द ताक़त से लैस 

वर्षो से चले आ रहे रिश्ते 

और अरसों से चल रहे जुड़ाव को 

बाट देने की ताकत रखता हैं 

अनगिनत टुकड़ो में...


आख़िरी शब्द में गुंजाइश नही होती 

'किसी रिश्ते को जारी रखने की'

या 

'दुबारा उसी स्थिति में लौट आने की...


आखिरी" शब्द तमाम शब्दों के खत्म होने के पश्चात आता हैं और अंत बनकर ही रह जाता हैं

ये सूचक होता हैं 

वर्तमान का भूतकाल में बदल जाने का...


ये चीख़ती हैं...समाप्ति को रोकने के लिए

शोर करता हैं दो रूह के रास्ते मे आने से 

इंतजार करता हैं किसी तीसरे का

जो रोक दे 

इस शब्द को वास्तविक बन जाने से...


तमाम जुड़ाव के साधन फ़ोन कॉल्स,मैसेजेस,मुलाक़ात में जब "आख़िरी"

शब्द जुड़ जाता हैं

रिश्ता क्षणभर में बेबुनियाद और मूल्यहीन बन जाता हैं...


आख़िरी शब्द आख़िरी मे ही आता हैं

और सबकुछ आख़िरी बना कर चल देता हैं"


- अन्नू साह अनुपम

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