विशिष्ट पोस्ट

डॉ सरिता चंद्रा की कविता - आरक्षण



समाज देश में जाति आरक्षण के आने से

योग्यता, कुशलता पर प्रतिघात हो गया

जब से आरक्षण का समाज में शुरुआत हुआ

तब से देश की बर्बादी का आगाज हो गया

यह दुर्भाग्य है मेरे देश की युवाओं का क्योंकि

आज काबिलियत से ऊँचा कास्ट हो गया

इस बीमारी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में

हुनरमंद फेल और गधा पास हो गया

इस आरक्षण नीति की वजह से ही

गुणवत्ता, अर्हता का सत्यानाश हो गया

बड़े ही असमंजस की बात है ये

योग्य युवा का सामान्य, पिछड़ा होना पाप हो गया

ऊँचे पद के लिए योग्यता, हुनर से ज्यादा जरुरी

जातिगत आरक्षण का कागजात हो गया

इससे समाज में प्रगति उन्नति की मौत हो रही

और समाज में श्रेष्ठ होना एक मजाक हो गया

इस आरक्षण के जहर से काबिल युवा बर्बाद हो गया 

और ऊँचे-ऊँचे पदों पर नालायक निकम्मों का राज हो गया


*लेखिका – डॉ सरिता चंद्रा*
*बालको नगर, कोरबा (छत्तीसगढ़)*

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां