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समाज को आईना दिखाता काव्य संग्रह - मुस्कुराते दर्द


"लिखती नहीं मैं व्याकरण, मुस्कुराते दर्द लिखती हूँ
हिंदी का मुझको ज्ञान नहीं, हँसते- रोते शब्द लिखती हूँ

काव्य-कविता में सजाकर मैं हृदय के भाव लिखती हूँ
जिन्हें निहारा है तड़पते हुए, उन दिलों के घाव लिखती हूँ"

कविता की ये पंक्तियां पढ़कर आपको यह अवश्य पता चल गया होगा कि इतनी दर्द भरी कविता का सृजन कोई आम रचनाकर नहीं कर सकता है। इतनी दर्द भरी रचना का सृजन सिर्फ वही रचनाकार कर सकता है। जिसका स्वयं का जीवन दर्द से भरा हो।

ज़िन्दगी के हर एक पल से संघर्ष करती हुई कवयित्री वंदना शर्मा (पत्रकार) कवयित्री कैसे बनी , यह जानकर आपकी आँखे नम हो जाएँगी ।
यह घटना उस वक़्त की है जब वंदना शर्मा मात्र 8 वर्ष की थी। एक दिन उन्होंने एक युवक को अपनी पत्नी को बुरी तरह पीटते हुए देखा। जब औरत बेहोश हो गई तो युवक ने उसे रस्सी से बाँधकर चिलचिलाती धूप में लिटा दिया, और फिर उस पर लाठी से अनगिनत प्रहार किया। एक स्त्री के प्रति पुरुष का यह दुर्व्यवहार देखकर और स्त्री की चीखों से वंदना शर्मा द्रवित हो उठी। यह चोट सीधे उनके दिल पर लगी। इस चोट ने वंदना शर्मा को 8 वर्ष की अल्पायु में कवयित्री वंदना शर्मा बना दिया। इनको इस वक़्त की महादेवी वर्मा भी कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। करुण रस की प्रमुख कवयित्री वंदना शर्मा जी की रचनाएँ देश के प्रतिष्ठित पत्र -पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं।कई साहित्यिक संस्थाओं से इन्हें अनेक राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। इंक़लाब ऑनलाइन पत्रिका ने स्वयं इन्हें इंक़लाब साहित्य रत्न , इंक़लाब श्रृंगार रत्न, राष्ट्र गौरव, राष्ट्र मार्गदर्शक, इंक़लाब काव्य शिरोमणि , सृष्टि रक्षक, इत्यादि सम्मान से सम्मानित किया है।

'मुस्कुराते दर्द ' इनका पहला काव्य संग्रह है। इस संग्रह में करुण रस से भरी हृदयस्पर्शी 59 कविताएँ संकलित हैं।
इनकी कविताओं में जीवन के विभिन्न रूपों , प्रकृति, प्रेम, देशभक्ति , सहानुभूति, समाज में व्याप्त बुराई, महामारी इत्यादि का चित्रण देखने को मिलता है। हम कवयित्री वंदना शर्मा जी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। 'मुस्कुराते दर्द' काव्य संग्रह पूरी तरह से पठनीय है। हमें पूरा विश्वास है कि यह संकलन आपको अवश्य पसंद आएगा।


पुस्तक - मुस्कुराते दर्द
प्रकाशक - इंक़लाब ऑनलाइन पत्रिका
मूल्य - 118 रुपए मात्र

संपादक
सागर यादव ज़ख़्मी

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