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सोनिया ने बुलाई विपक्षी दलों की बैठक, शरद पवार-ममता-येचुरी होंगे शामिल, मायावती ने बनाई दूरी


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कोरोना संकट से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से प्रभावित प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं पर चर्चा के लिए आज विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज पर चर्चा हो सकती है।
प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर होगी वीडियो कांफ्रेंसिंग
सूत्रों के अनुसार वाडियो कांफ्रेसिंग के जरिये बुलाई गई इस बैठक का उद्देश्य समान विचार वाले दलों को एक मंच पर लाना और अपने घरों को लौट रहे लाखों प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का समाधान तलाशना है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता होने वाली इस बैठक में शामिल होने के लिए 17 विपक्षी दलों ने सहमति दी है। बैठक में किसानों की समस्याओं और उत्तर प्रदेश सहित भाजपा शासित राज्यों में श्रम कानूनों में बदलावों पर भी विचार विमर्श होगा।
इन पार्टियों के बारे में अभी संशय
सूत्रों के अनुसार आज दोपहर तीन बजे होने वाली इस वर्चुअल मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए अभी तक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सहमति नहीं दी है। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने कई विपक्षी नेताओं को व्यक्तिगत स्तर पर कॉल किया और प्रवासी मजदूरों के मुद्दे के समादान के लिए संयुक्त रणनीति बनाने में सहयोग देने का अनुरोध किया।
ये दल चर्चा में हिस्सा लेंगे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शिव सेना के सांसद संजय राउत सोनिया गांधी द्वारा बुलाई बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शिरकत करेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में संवाददाताओं से बातचीत में बैठक में हिस्सा लेने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि आज दोपहर वीडियो कांफ्रेंस के जरिये होने वाली बैठक में मौजूदा हालात पर चर्चा होगी। इस बैठक में वह हिस्सा ले रही हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआइ) के नेता डी. राजा ने भी कहा कि उनकी पार्टी बैठक में हिस्सा ले रही है। उनकी पार्टी कुछ राज्यों में श्रम कानूनों को कमजोर करने का भी मुद्दा उठाएगी।
कांग्रेस ने कहा- संसद को किनारे कर दिया गया
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछे जाने पर इसके बारे में कहा कि जब भी कोई गंभीर मुद्दा आता है, सोनिया गांधी और राहुल गांधी सामने आते हैं। देश की सबसे बड़ी संस्था संसद को किनारे कर दिया गया है। संसदीय निगरानी लगभग गायब हो चुकी है। लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर कर दी गई हैं। वे लोकतंत्र के लिए अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही हैं।

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