राजीव रतन गांधी की पुण्यतिथि 21 मई पर विशेष , बिसरती नहीं राजीव गांधी की फतेहपुर में सदभावना यात्रा - रवीन्द्र त्रिपाठी


फतेहपुर। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सद्भावना यात्रा भूले नहीं भूलती है फतेहपुर में उनका भव्य स्वागत किया गया था और उन्होंने कई किलोमीटर तक कार की छत पर बैठकर यात्रा की थी। उस समय स्वागत समारोह में शामिल होने वाले लोगों की यादों में वह  दृश्य बार-बार उभरता है।
           ज्येष्ठ माह की दुपहरी में गौरांग राजीव रतन गांधी उस समय विपक्ष के नेता थे और निवर्तमान प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अंतर्देशीय सद्भावना यात्रा प्रारंभ की थी और जगह-जगह पर उनका भव्य स्वागत इस तरह हो रहा था कि उनकी यात्रा कई घंटे विलंब से निर्धारित स्थानों पर पहुंचती थी।
         फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर उनके आते ही हजारों की संख्या में मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया फतेहपुर खागा बिंदकी जहानाबाद अमौली किशनपुर हथगांव आदि के कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया बिंदकी के ही कार्यकर्ताओं ने 51 किलो की माला पहनाई थी वह पद यात्रा करना चाहते थे लेकिन सुरक्षा कारणों से भारी भीड़ को देखते हुए उन्होंने एक कार की छत पर बैठकर सद्भावना यात्रा शुरू की हजारों की तादाद में कार्यकर्ता राजीव गांधी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे और फूलों से पंखुड़ियों से उनका स्वागत कर रहे थे। जगह-जगह उनका तिलक लगाकर भी स्वागत किया गया। उस समय के जो कांग्रेस जन सद्भावना यात्रा में शामिल है उन्हें वह यात्रा आज भी  बिसरती नहीं है।
         लेकिन वह मनहूस सुबह मर्माहत कर गई जब पता चला कि तमिल हितों के लिए, उनको राहत पहुंचाने के लिए लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में मालवाहक विमान से आवश्यक सामग्री जाफना क्षेत्र में भेजकर अपनी ताकत दिखाकर, श्रीलंका में चीनी फौज को उतरने से रोकने के लिए शांति सेना भेजने वाले, सिख आतंकवाद को घ्वस्त करने वाली तत्कालीन लौह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लाडले पुत्र राजीव गांधी को तमिल समर्थित लिट्टे आतंकवादियों ने आत्मघाती हमलाकर विस्फोटक से उड़ा दिया।
        समाचार सुनकर समूचा भारतवर्ष ही नहीं वरन संपूर्ण विश्व हतप्रद रह गया था । उस दिन श्रृद्धांजलि में जो अश्रु बहे थे उनमें फतेहपुर के भी अश्रु सम्मिलित थे। यह महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी के पश्चात तीसरी शीर्ष हत्या थी । लेकिन अफसोस आज लोग 70 साल का हिसाब पूंछ रहे हैं। हम जानते हैं कि वह उत्तर जानते है लेकिन सुनना ही नहीं चाहते। क्यों कि उनमें कुछ गोड्सेवादी है, भिंडर वादी हैं, लिट्टेवादी हैं, नक्सलवादी है और ना जाने कौन -कौन शामिल है।

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