शिक्षाधिकारियों के समक्ष बौना पडा निदेशक का आदेश


फ़तेहपुर, 02 दिसम्बर। बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात  बीएसए व खण्ड शिक्षा अधिकारियों के ख़िलाफ़ करीब दस माह पहले विभाग के विशेष सचिव  द्वारा कार्यवाही की सिफारिश शासन से की थी। इन पर कार्यवाही के बजाय उच्चाधिकारियों की कृपा से मलाईदार सीट मिल गई।
 जनपद में  भ्रष्टाचार का एक बडा मामला प्रकाश में आया है। करीब दस माह पहले मुख्यमंत्री को भेजे गये एक शिकायती पत्र में विभाग के तत्कालीन विशेष सचिव आनन्द कुमार सिंह द्वारा 18 जनवरी को प्रदेश के शिक्षा निदेशक (बेसिक) को भेजे गये एक अति गोपनीय पत्र के विस्तार से उल्लेख ने समूचे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। इस पत्र में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्यवाही की पुरज़ोर सिफ़ारिश की गई थी उन्हें दो- दो विकास खंडो का कार्यभार सौंप दिया गया।
  सूत्र बताते है कि  विशेष सचिव द्वारा विभाग के निदेशक को भेजे गये अति गोपनीय पत्र में बेसिक शिक्षा विभाग (फ़तेहपुर) में कार्यरत लिपिक/खण्ड शिक्षा अधिकारियों एवं ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी पर कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता जताई गई थी। बीएसए कार्यालय फ़तेहपुर में प्रशासनिक स्थानांतरण की आड़ में रिश्वत लिये जाने एवं तत्कालीन ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार के विरुद्ध की गई शिकायतों की जाँच त्रि-स्तरीय कमेटी गठित करते हुए करने एवं जाँच आख्या शासन को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिये गये थे। जिस पर तत्कालीन डीएम ने जाँच करवाई और जाँच आख्या 15 सितम्बर 2013 को शासन को भेजते हुए मामला अति गंभीर होने पर शिकायतों की विभागीय जाँच करवाने की भी पुरज़ोर सिफ़ारिश की!
  तत्कालीन डीएम की सिफ़ारिश के क्रम में शासन ने 09 अक्टूबर 2018 को जारी आदेश के अनुपालन में विशेष सचिव ने दो सदस्यीय जाँच समिति बनाते हुए सम्बंधित शिकायतों की गंभीरता से जाँच कर जाँच आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। सूत्रों के अनुसार जाँच समिति ने लगभग 20 दिनो के अंदर जाँच पूरी करके जाँच आख्या 29 अक्टूबर 2018 को शासन को भेज दी गयी। उक्त जाँच आख्या के परीक्षणोपरांत संज्ञान में आयी गम्भीर अनियमितताओ के दृष्टिगत अंतर्ग्रस्त जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत लिपिक/खण्ड विकास अधिकारियों एवं ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा वित्त लेखाधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही किये जाने का निर्णय लिया गया।
    बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन विशेष सचिव ने इस सन्दर्भ में एक पत्र शिक्षा निदेशक (बेसिक) को भेजते हुए उपरोक्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए कृत कार्यवाही से शासन को अवगत कराने की माँग की। बेसिक शिक्षा अनुभाग-1 दिनांक 18 जनवरी 2019 के जिस पत्र में कार्यवाही का उल्लेख किया गया था उसमें खण्ड शिक्षा अधिकारी देवेन्द्र सिंह व राकेश सचान को तत्कालिक प्रभाव से जनपद के बाहर दूरस्थ जनपद में प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करने, बी॰एस॰ए॰ कार्यालय के वरिष्ठ सहायक को तत्कालिक प्रभाव से जनपद के बाहर दूरस्थ जनपद में स्थानांतरित करने, मृतक आश्रित के रूप में ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ सहायक तथा अप्रशिक्षित सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय अज़गवा वि०ख० तेलियानी को क्रमशः 1993 एवं 2005 में नियमो के विपरीत नियुक्तियों को विधिक राय लेकर उनके पदस्थापना को निरस्त करने, सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में की गई नियुक्तियों के प्रत्येक अभ्यर्थी की नियुक्ति का परीक्षण इस आशय से करने कि क्या वे नियुक्ति के समय योग्यता रखते थे। साथ ही साथ उनके प्रमाणपत्रों का भी सत्यापन कराया जाये। यदि अनियमित/फ़र्ज़ी नियुक्तियाँ मिलें तो संबंधितो को सेवा से बर्खास्त किया जाये, मृतक आश्रित के रूप में 24 जून 1993 व 19 मार्च 2005 को नियुक्तियाँ करने वाले क्रमशः तत्कालीन उपशिक्षा निदेशक चतुर्थ मण्डल, इलाहाबाद व ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी के ख़िलाफ़ भी संदिग्ध भूमिका के चलते विभागीय कार्यवाही करने, मौजूदा ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा भी जाँच समिति की जाँच कार्यवाही में सहयोग न देने पर उनसे स्पष्टीकरण माँगते हुए सभी मामले शासन को भेजते हुए कार्यवाही की अपेक्षा तो की गई किन्तु लगभग 10 माह बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है।
 खास  बात यह है कि इस मामले को न तो निदेशक ने गम्भीरता से लिया और न ही शासन ने! यहाँ तक कि तत्कालीन डीएम की जाँच पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। अंधेरगर्दी तो तब हो गई जब खण्ड शिक्षा अधिकारी देवेन्द्र वर्मा का जालौन जनपद तबादला हो जाने के बावजूद उन्हें रिलीब नही किया गया और असोथर व बहुआ ब्लाक का चार्ज सौंप दिया गया। इसी तरह राकेश सचान का हमीरपुर जनपद तबादला होने के बावजूद रिलीब नहीं किया गया और तमाम शिकायतों के बावजूद खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के पद पर बरक़रार रखा गया। उपरोक्त मामले में शिक्षा विभाग का कोई भी ज़िम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां