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बाल श्रम कानून की धज्जियां उड़ाता फतेहपुर रेलवे स्टेशन


 रवीन्द्र त्रिपाठी

फतेहपुर 27 नवंबर फतेहपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 पर बाल श्रमिकों से काम करा कर सरेआम बाल dc श्रम की धज्जियां उड़ाई जा रहे हैं ।सबसे खास बात तो यह है कि यहां पर जिले के सभी आला अफसर आते जाते रहते हैं फिर भी किन कारणों से अनदेखी किए हुए हैं यह एक बड़ा सवाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर दो पर बिना ब्लॉक लिए हुए बाल श्रमिकों से मेल लाइन पर काम कराया जा रहा है। जिससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है रेलवे के अधिकारी भी बाल श्रमिकों से काम कराने पर कोई आपत्ति नहीं जता रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि यहां पर बाल श्रम कानून कोई मायने नहीं रखता। सरेआम बाल श्रम की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े ही इत्मीनान से ठेकेदार काम करवा रहा है।
रेलवे स्टेशन में जो श्रमिक काम कर रहे हैं उनकी महक उम्र 10 से 15 वर्ष के बीच की है ऐसा लगता है कि इन बाल श्रमिकों से काम कराने में रेलवे प्रशासन या जिले के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को कोई भी गुरेज नहीं है।
 केंद्र व प्रदेश सरकार समय-समय पर बाल श्रमिकों के काम करने पर आपत्ति उठाते हुए अधिकारियों को कार्रवाई किए जाने का आदेश देती रहती है,
 किंतु फतेहपुर रेलवे स्टेशन में काम कर रहे बाल श्रमिकों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि प्लेटफॉर्म 2 की मेन लाइन पर ठेकेदारी के माध्यम से काम कराया जा रहा है और ठेकेदार कम मजदूरी देकर बाल श्रमिकों का शोषण कर रहा है।
दिल्ली हावड़ा मेन लाइन ठेकेदार द्वारा बिना ब्लॉक लिए हुए काम कराए जाने से कभी भी इन बाल श्रमिकों को दुर्घटना का शिकार होना पड़ सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि इन बाल श्रमिकों से काम कराने हैं की इजाजत किसने दी और क्या रेलवे लाइनों में काम करने के लिए बाल श्रमिकों से काम कराने की शासन और प्रशासन ने छूट दे रखी है।
बिना ब्लॉक लिए हुए बाल श्रमिकों से एक काम कर आते समय अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसकी की जिम्मेदारी कौन लेगा ?क्या रेलवे विभाग इसके लिए जिम्मेदार होगा? यह सबसे बड़ा सवाल है।
अब यह भी सवाल उठता है कि श्रम विभाग सब कुछ जानते हुए भी इन बाल श्रमिकों के प्रति क्यों जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है?

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