किसान मृदा शोधन के साथ बीज शोधन भी करें-सत्येंन्र्द सिंह



फतेहपुर 11 नवम्बर ।रबी की बुवाई के दौरान बीज जनित व भूमि जनित रोगों व कीटों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने एडवाजरी जारी की है।
   यह जानकारी देते हुए     जिला कृषि रक्षा अधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि किसान भाइयों रबी की बुवाई का समय चल रहा है । फसलों में विभिन्न बीज जनित एवं भूमि जनित रोगों व कीटो से फसलों को बचाना आवश्यक है । भूमि जनित एवं बीज जनित रोगों से बचाव हेतु भूमि शोधन एवं बीज शोधन अति अवश्यक है । भूमि शोधन हेतु किसान भाई ट्राइकोडर्मा हरजेनियंम 1.5 प्रतिशत एवं व्यूवेरिया वैसियाना 1 प्रतिशत की 2.50 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 60-75 किग्रा सड़ी गोबर की खाद से मिलाकर 8-10 दिन जूट के बोरे से ढक कर छाया में रखे  एवं पानी के छीटे प्रतिदिन मारते रहे , तत्तपश्चात अंतिम जुताई के समय खेत में मिलाकर भूमि उपचारित करे ।
इसी प्रकार गेंहू, चना, राई, सरसो बीज शोधन हेतु थीरम 75 प्रति डी0पी0 2.5 ग्राम मात्रा को 01 किग्रा बीज की दर से शोधन करे । आलू के बीज उपचार हेतु कॉर्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्लू पी 01 ग्राम अथवा मैकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी मे घोल तैयार कर बीज उपचारित करे । एक बार मे बनाये गए घोल में 10-15 वार आलू को उपचारित किया जा सकता है । उपचारित बीज की बुआई 24 घंटे के अंदर अवश्य कर ले ।

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