अब 55 के बाद अध्यक्षी नही,भाजपा ने जारी की नई गाइडलाइन


रवीन्द्र त्रिपाठी


फ़तेहपुर,19 नवम्बर।
दुनिया का सबसे बड़ा सियासी दल भाजपा ने जिलाध्यक्षी के चुनाव की गाइड लाइन जारी कर दी है। नये नियमो के तहत ज़िंदगी के 55 सावन पूर्ण कर लेने वालों को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी ने इस उम्र की सीमा पार करने वालों को “आउट ड़ेटेड” मानते हुए उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। पूर्व में उम्र सीमा 60 वर्ष थी, जिसे 05 वर्ष कम कर दिया गया है। वही अब तक के ज़िला अध्यक्षो पर ग़ौर करे तो अधिकांश ऐसे रहे जो अलग-अलग कारणो से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये।मौजूदा समय में तीन विधायक पूर्व में ज़िला अध्यक्ष रह चुके है।
    ज्ञातव्य रहे कि भाजपा के संविधान के मुताबिक़ ज़िलाध्यक्ष का कार्यकाल 03 वर्ष का होता है, किन्तु संगठन की सेवा शर्तों पर खरा न उतरने या वरिष्ठ जनो व जनप्रतिनिधियो की शिकायत पर कभी भी उसे पद से हटाया जा सकता है। जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनने के बाद इस पद पर ज़्यादातर ब्राह्मण ज़िला अध्यक्ष रहे किन्तु अपवाद स्वरुप स्व० उमाशंकर त्रिपाठी के एक कार्यकाल को छोड़ दिया जाये तो कोई भी ब्राह्मण ज़िला अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाया! जबकि ग़ैर ब्राह्मण ज़िला अध्यक्ष अमरनाथ चौरसिया, कृष्णा पासवान व रणवेंद्र प्रताप उर्फ़ धुन्नी सिंह अपना अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहें।
      भाजपा के जानकार बताते है कि जनसंघ से भाजपा बनने के बाद श्रीधर शुक्ल, अमरनाथ चौरसिया, महेन्द्र नाथ बाजपेई, उमा शंकर त्रिपाठी (तीन बार), पं० हरिनारायण दुबे उर्फ़ नंदन बाबू, मनोज शुक्ला, रामाकान्त त्रिपाठी, करन सिंह पटेल, प्रभुदत्त दीक्षित, कृष्णा पासवान, धुन्नी सिंह, दिनेश बाजपेई व प्रमोद द्विवेदी ज़िलाध्यक्ष बने किन्तु स्व० उमाशंकर त्रिपाठी के एक कार्यकाल को छोड़ दिया जाये तो कोई भी ब्राह्मण ज़िलाध्यक्ष अलग-अलग कारणो से कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। बताते चले कि पूर्व ज़िलाध्यक्ष दिनेश बाजपेई को सत्ता मिलने के बाद विधायकों की शिकायत पर पद से हाथ धोना पड़ा जबकि केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अति नज़दीकियों में उनकी गिनती हमेशा से होती रही है।
      मौजूदा समय में पार्टी के तीन विधायक करन सिंह पटेल, कृष्णा पासवान, धुन्नी सिंह पूर्व में ज़िला अध्यक्ष रह चुके है। इनके पूर्व दो मौक़ों पर भाजपा ने पूर्व ज़िला अध्यक्ष श्रीधर शुक्ल व मनोज शुक्ला को विधायकी का चुनाव लड़ाया किन्तु दोनो को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
     भारतीय जनता पार्टी द्वारा  जिलाध्यक्षी के चुनाव के लिये ऐन मौक़े पर नियमो में बदलाव कर देने से वरिष्ठ नेता पं० शिव प्रसाद त्रिपाठी व कांट्रैक्टर राकेश तिवारी एड० को तगड़ा झटका लगा है, जिनके ज़िलाध्यक्ष बनने का सपना सपने में ही टूट गया! एक अन्य जानकारी के अनुसार बुधवार को जो भी दावेदार नामांकन कराने जायेगा उसे हाईस्कूल की मार्कशीट या आधार कार्ड की स्वाहस्ताक्षरित छायाप्रति भी नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा। छायाप्रति भी नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।

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